ग्राम पंचायत 34LNP

भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र 34एल एन पी .

GRAM PANCHAYAT 34LNP OFFICE

डीजी घर DIGITAL .

ग्राम पंचायत 34LNP

ग्राम पंचायत ३४ एल एन पी में मनोरजन कार्यक्रम का आयोजन .

ग्राम पंचायत ३४ एल एन पी

भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र .

ग्राम पंचायत ३४एल एन पी

ग्राम पंचायत ३४ एल एन पी ई मित्रा प्लस मशीन .

ग्राम पंचायत ३४एल एन पी

ग्राम पंचायत ३४ एल एन पी ई मित्रा प्लस मशीन .

ग्राम पंचायत ३४एल एन पी

गोगा मेडी ३४एल एन पी .

ग्राम पंचायत ३४एल एन पी

बालाजी मंदिर ग़ाव ३४ एल एन पी .

ग्राम पंचायत ३४एल एन पी

ग़ाव ३४ एल एन पी .

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Tuesday, July 2, 2019

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए

अब सभी किसान, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए ई-मित्र पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं| जिन किसानों के आवेदन 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि होने की वजह से निरस्त हो गए थे, वे सभी किसान अब पुनः आवेदन कर सकते हैं| #emitra #emitrarajasthan

Friday, June 14, 2019

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान


‘यह डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम, भारत में चलाए जाने वाले किसी भी अन्य साक्षरता कार्यक्रम के जैसा ही है. अगर इस कार्यक्रम में दाखिला लेने वाला कोई व्यक्ति अपना नाम लिखने के लायक हो जाता है, तो उसे ‘साक्षर’ की श्रेणी में डाल दिया जाता है. इन कार्यक्रमों का इस्तेमाल सरकार अपने आंकड़ों को चमकाने के लिए कर रही है.’
यह कहना है राजस्थान स्टेट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्टिफिकेट (आरएस-सीआईटी) धारक हेमराज का. राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए आईटी साक्षरता का यह कोर्स अनिवार्य है.
दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों में से एक प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजी-दिशा) का लक्ष्य 2019 तक ग्रामीण भारत में छह करोड़ घरों को ‘डिजिटल तौर पर साक्षर’ बनाना है.
इसका बजट 2,351 करोड़ रुपये रखा गया है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस योजना के तहत 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्रों से 200-300 उम्मीदवारों को इस कार्यक्रम से जोड़ना है.
कॉमन सर्विस सेंटर का ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय द्वारा कंपनीज़ एक्ट, 1956 के तहत मान्यता प्राप्त एक स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी विशेष मकसद से गठित उपक्रम है.
इस योजना के क्रियान्वयन की देख-रेख करने की ज़िम्मेदारी इस पर ही है. सेवाएं प्रदान करने के लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में कम से कम एक कॉमन सर्विसेज सेंटर (सीएससी) की बात कही गई है.
पीएमजी-दिशा ट्रेनिंग विभिन्न एजेंसियों द्वारा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के मॉडल पर दी जाती है. इन एजेंसियों को ट्रेनिंग पार्टनर के तौर पर जाना जाता है.
हर ग्राम पंचायत में ये प्रशिक्षण केंद्र (ट्रेनिंग सेंटर) गांवों से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर हैं. कई जगहों पर पहले से ही चल रहे निजी प्रशिक्षण संस्थानों को इन प्रशिक्षण केंद्रों में बदल दिया गया है.
इन केंद्रों को हर रजिस्टर्ड उम्मीदवार के लिए 300 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन सिर्फ तभी जब वे सर्टिफिकेशन के लिए एक घंटे के ऑनलाइन ऑब्जेक्टिव टेस्ट में सफल होते हैं.
हर सेंटर के पास कम से कम तीन कंप्यूटर होने चाहिए, जिनके वेबकैम, बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट स्कैनर या आइरिश स्कैनर, इंटरनेट कनेक्शन और बिजली बैकअप से सुसज्जित होने की उम्मीद की जाती है.
प्रशिक्षण का खाका
इस कार्यक्रम के तहत टैबलेट, स्मार्ट फोन और कंप्यूटर आदि उपकरणों को चलाने, इंटरनेट ब्राउज करने, ई-मेल का इस्तेमाल करने, नागरिकों से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने और डिजिटल भुगतान करने की ट्रेनिंग देना शामिल है.
ट्रेनिंग की विधि का फैसला करने का अधिकार प्रशिक्षक (ट्रेनर) को दिया गया है. ऐसा कोई तरीका नहीं है, जिससे इस बात की जांच की जा सके कि उम्मीदवार को 20 घंटे की ट्रेनिंग समुचित तरीके से दी गई है या नहीं.
इस योजना के एक ट्रेनिंग पार्टनर एक्सेल टेक्नोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के सुनील ने द वायर को बातचीत में बताया, ‘हम विषय से जुड़े वीडियो साझा करते हैं और सॉफ्टवेयर से संबंधित कोई समस्या आने पर प्रशिक्षकों को तकनीकी सहायता देते हैं.’
जयपुर के निवारू गांव में चलने वाले एक सेंटर के ट्रेनर मोहन लाल यादव ने बताया, ‘पीएमजी-दिशा के तहत चलाई जाने वाली कक्षाओं के लिए कोई तय समय नहीं है. उम्मीदवार सामान्य तौर पर सिर्फ ऑनलाइन टेस्ट देने के लिए आते हैं. इसके तहत रजिस्टर्ड उम्मीदवार आमतौर पर 15-35 आयुवर्ग के होते हैं. हमारा सेंटर आरएस-सीआइटी कोर्स भी कराता है. इसलिए हम इस कोर्स के विद्यार्थियों को साथ में ही पीएमजी-दिशा के लिए भी आवेदन करवा देते हैं.’
हर केंद्र में सिर्फ तीन कंप्यूटर हैं. जिसके कारण हर विद्यार्थी को अलग-अलग व्यक्तिगत तौर पर ट्रेनिंग देने में कठिनाई होती है. इसलिए ट्रेनर एक साथ कई विद्यार्थियों को एक ही स्क्रीन पर पढ़ाते हैं.
एमएल शर्मा, जो सांगानेर के एक सेंटर में बतौर ट्रेनर काम कर रहे हैं, ने बताया, ‘इस कोर्स के तहत हर विद्यार्थी को दस दिनों तक दो घंटे की ट्रेनिंग देने की बात कही गई है. मेरे साथ पीएमजी-दिशा के तहत करीब 63 विद्यार्थी रजिस्टर्ड हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘करीब 200 विद्यार्थी आरएस-सीआईटी, टैली और डेस्कटॉप पब्लिशिंग (डीटीपी) के लिए हमारे संस्थान में आते हैं. दूसरे कोर्सों के लिए फीस 3,000 से 4,000 रुपये के करीब है, लेकिन पीएमजी-दिशा के लिए हमें प्रति उम्मीदवार सिर्फ 300 रुपये का भुगतान ही किया जाता है. ज़ाहिर है, हमारे लिए यह कोर्स घाटे का सौदा है.’
प्रशिक्षण की उपलब्धि
हालांकि, इस कोर्स के तहत व्यापक डिजिटल ट्रेनिंग देने की बात कही गई है, लेकिन छात्रों के शिक्षण उपलब्धि (लर्निंग आउटकम) के आकलन के लिए सिर्फ पांच डिजिटल लेन-देन और ई-मेल सत्यापन (वेरिफिकेशन) (@pmgdisha.in) को ही पर्याप्त माना गया है.
शर्मा ने यह भी बताया, ‘विद्यार्थी के आउटकम फॉर्म को पूरा करने के लिए पांच डिजिटल लेन-देन अनिवार्य है, जिसके बाद उसे प्रमाण पत्र दिया जा सकता है. एक-एक रुपये का यह लेन-देन ट्रेनिंग सेंटर के खाते से कॉमन सर्विस सेंटर के बीच, सूची में दिए गए किसी एक तरीके (यूएसएसडी, एईपीएस, भिम/यूपीआई, ई-वॉलेट, नेफ्ट आदि) से किया जा सकता है. यह लेन-देन वास्तव में किसके द्वारा किया गया है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है. सामान्य तौर पर ये काम ट्रेनर ख़ुद ही कर देते हैं.’
औपचारिकताओं का बोझ
ट्रेनर के कंधे पर रोजाना के दो घंटे की ट्रेनिंग के अलावा और भी कई ज़िम्मेदारियां लादी गई हैं. इसमें हर उम्मीदवार का आधार और बैंक ब्यौरा भरना, पंचायत के दस्तावेज़ के लिए सरपंच से अनुमति लेना, ई-मेल पते को सत्यापित करना, डिजिटल लॉकर बनाना, और आउटकम फॉर्म भरना शामिल है.
अगर ट्रेनिंग सेंटर सीएससी है, तो भुगतान सीधे उनके बैंक अकाउंट में कर दिया जाता है, लेकिन अगर ट्रेनिंग सेंटर ट्रेनिंग पार्टनर के तहत काम कर रहा है, तो भुगतान पार्टनर को भेजा जाता है, जो बाद में ट्रेनिंग सेंटरों को उनका पैसा देता है.
एक ट्रेनर ने नाम न बताए जाने की शर्त पर द वायर को बताया कि ‘औपचारिकताओं की संख्या इतनी ज़्यादा है कि हमारा सारा समय उन्हें पूरा करने में ही चला जाता है और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का समय ही नहीं मिलता.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ट्रेनिंग पार्टनर द्वारा अपना कमीशन काट लेने के बाद हमारे हाथ में 300 रुपये में से मात्र 225 रुपये ही आते हैं. सरपंच भी अपना हिस्सा मांगता है, जिसे देने के बाद हमारे हाथ में बहुत कम बचता है. कोई भी इतने कम पैसे के लिए इतनी मुसीबत क्यों मोल लेगा? कई ट्रेनर पीएमजी-दिशा कोर्स के लिए उम्मीदवारों से 100-100 रुपये ले लेते हैं, जबकि यह मुफ्त है.’
एक ऐसा इम्तिहान जिसमें कोई फेल नहीं होता
इस कार्यक्रम में यह व्यवस्था की गई ‘ट्रेनिंग एजेंसियों को सीएससी-एसपीवी द्वारा ट्रेनिंग का पैसा उम्मीदवारों के निर्धारित दक्षता कसौटियों पर खरा उतरने के बाद सफल सर्टिफिकेशन के बाद ही दिया जाएगा.’
इस कोर्स में अधिकतम 250 उम्मीदवारों को दाखिला दिया जा सकता है. एक बार 250 छात्रों को दाखिला दे देने के बाद (जिसकी निगरानी पोर्टल पर की जाती है), नामांकन बंद हो जाता है. अगर इन 250 विद्यार्थियों में से कोई फेल हो जाए (जो आज तक कभी नहीं हुआ है), तो उसकी जगह किसी अन्य को दाखिला देने का प्रावधान नहीं है.
ऑनलाइन टेस्ट में 25 सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें से अगर 7 का सही उत्तर दे दिया जाए, तो उम्मीदवार परीक्षा पास कर जाता है. प्रशिक्षकों की मानें, तो इन 25 में से 20 सवाल सामान्य तौर पर हर बार दोहराए जाते हैं.
निवारू ग्रामीण केंद्र में बतौर ट्रेनर सेवा दे रहे सैनी ने बताया, ‘अगर कोई छात्र 7 सवालों का सही जवाब देने में कामयाब रहता है, तो वह पास कर जाता है. अगर वे टेस्ट में पास नहीं होते हैं, तो हमें ट्रेनिंग का पैसा नहीं मिलता है.’
द वायर से बात करते हुए राजस्थान में पीएमजी-दिशा के प्रतिनिधि मधुकर शर्मा ने कहा, ‘डिजिटल सर्टिफिकेशन के लिए ऑनलाइन टेस्ट शुरू करने के लिए छात्र के बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे किसी परीक्षार्थी के बदले किसी अन्य के बैठने की गुंजाइश नहीं बचती. साथ ही, उम्मीदवार के अकाउंट से पांच डिजिटल लेन-देन (जो रिफंडेबल है) ज़रूरी है. सेंटर के अकाउंट से लेन-देन मान्य नहीं है. अपने अकाउंट से लेन-देन करने वाले सेंटरों का बिल नहीं बनाया जाता.

PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana)

PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana)
PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) comes under the scheme of “Skill India” which was launched by Prime Minister Shri Narendra Modi on 15th July 2015. The PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Scheme) was launched to help the youth in India to specialize in different skills. This scheme aims to provide aptitude to the Indian youth towards major skills and raise the standard of working and the efficiency to complete the job. The enrolled students are motivated by giving monetary rewards to increase them and providing them with quality training. The scheme also intends to increase the employment rate from 4.9% in 2014. India has the largest number of youth, and the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Scheme will benefit them and make them the most employable and with better skill sets by the year 2022. PMKVY (Pradhan Mantri Kausha;l Vikas Yojana) has been rigorously implemented in states like Bihar to make the X/XII dropouts skilled and employable.
Skills imparted by PMKVY (Pradhan Mantri Kausha;l Vikas Yojana) are according to the current job requirements assessed by the National Skill Development Corporation (NSDC). Currently, about 430 job roles are being catered by the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY).
PMKVY Franchise
How does a student enroll for PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana)
Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Scheme has created awareness amongst the youth through SMS by partnering with various telecom operators. To enroll, candidates should give a missed call on the toll-free number-1800 102 6000. Potential candidates will receive a callback and will be asked to give the details into the system. These details will be recorded and will be screened. Eligible candidates will be provided with the details of the nearest training centers and will be issued a date for starting the training program on training dates. It is compulsory for the candidates to have an Aadhar Card or Voter ID or Pan Card.
PMKVY Franchise, Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Franchise
All the center- private training partners, corporate and Government affiliated would be required go through the Central Accreditation and Affiliation process as defined by the guidelines to avail PMKVY Franchisee. Any exception in the Centre Accreditation and Affiliation would be processed depending on various cases. Different cases would have a different approach by the committee.
All Training Centers should pay a Registration Fee of Rs. 12000. Annual monitoring fee of Rs. 8000 shall also be paid to monitor the activities of the training centers. Training Centers will also have to a pay an Affiliation fee of Rs. 1000 for each job role. Affiliation is granted to the Training Centers according to the job roles provided.
Training Centers would be designed to deliver PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) with a dedicated team. Training centers can provide government sponsored programs with guidelines pertaining with respective authorities.PMKVY Franchisee will be given less priority and these franchisees, according to their performance will either be converted to a dedicated training center or be phased out. First level franchisees are allowed to work under the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) Scheme. A suitable amount of due diligence is required between PMKVY franchisee and franchisor. A legal agreement must govern all franchisee and franchisor. NSDC shall not interfere in operational and disputes between franchisee and franchisor. Franchisees will be phased out as this scheme would not promote Training Centers to carry out other business operations using the resources provided by the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana). The training center will have to ensure attendance and will be assessed at all times. Students who do not have a bank account will be provided a Jan Dhan account with the help of the Training Centers associated with PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme.
Training Partners are always under the microscope in the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) scheme. Digital training facilities and able instructors are highly appreciated by NSDC and SSC. The curriculum developed by them should be highly relevant to the employability. Training sessions are constantly monitored by the Government.
PMKVY (PRADHAN MANTRI KAUSHAL VIKAS YOJANA) Projects Guidelines
Special projects are given to the candidates by the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Study Centers to encourage training in special areas, premise of Government bodies, corporate or industry bodies. This also pushes the candidate to have special job training which will be important for the placements. Projects are completely aligned to the common standards. A slight deviation in the project with the approval of the committee can be done.
Placement Guidelines in PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme
Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) aims to provide placement to every candidate and cover the gap of human resources. Currently, the country lacks skillful workforce. PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) provides the industry with the skilled workforce that has aptitude and knowledge.
Eligibility for Placement Payouts-
  • Training Centers in the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme should have placed 50% of the successfully certified candidates.
  • Training Centers should make provision for post placement sessions under PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme.
  • Training Centers will be discontinued if the placement rate is less than 50%.
  • Training Centers should provide a letter of employment of the candidate, salary slips, and salary certificate under PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) SCHEME.
  • If the candidate wants to get self-employed either of getting employed under Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Scheme (PMKVY Scheme), they need to provide the Training Centers with their Trade License, Proof of enterprise set up, proof of additional earning, etc.
Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Franchise
PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Certification
Apart from training provided in PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme, the candidates shall go through for a assessment at the end of the training schedule. A certificate of merit shall also be given at the end of the training period based on the assessment. SSC or the successors of NBSC will issue certificates to the successful candidates. Every candidate shall be provided with the 5- year accidental cover of Prime Minister Insurance scheme costing Rs. 60 per candidate for 5 years. An average monetary reward of Rs. 8000 is rewarded to successful candidates in the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme.
A failed or absent candidate can avail re-assessment during the entire period f the PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) scheme. The training partner will pay the re-assessment fees to the SSC and encourage the failed candidates to get their certification done.
A year later after the launch of the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) scheme on 15th July 2016, around 18 Lakh candidates have enrolled, and 17.93 lakh have been trained under this scheme. The National Skills Development Corporation is going to set up 50 India International Skill centers in the country by the end of 2016. This will help provide training to health workers, retail, security, tourism, hospitality, construction and domestic workers. Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) or Prime Minister Skill Development Scheme is on its path to achieve bigger goals and to decrease the unemployment rate in the country by 2022.
successfully completion of the training their skills will be accessed and then certified under RPL i.e Recognition of Prior Learning. The scheme helps the youth to get skillfully qualified and get an advantage in querying good jobs or start up with their own work.
Digi Seva is one of national level development organization which is every year providing direct benefit to over large number of children and their families every year, through its live welfare projects, people of our nation which is based upon education, healthcare, livelihood employment and women empowerment, over good number of remote villages and slums across different states of India. HINDFS from the starting itself works on a delegated work environment. Each and every person in HAINDFS is fully involved in the process of decision making in a particular system so that the things move in a clear and precise way. We at HINDFS work as Work as a role model in bringing required change in the lives of underprivileged children, youth and women, with a life-cycle approach of development. HINDFS has taken the certain step to develop the life style of our nation and has successfully and with a great passion they are working on it .That is the reason they cater each and every rural area to let the people benefited the government plans. HINDFS has very successfully educated the Indians under NDLM schemes that they can get digital education which as Digitization is must for a nation to grow and to develop and now it is working hard for the new scheme launched as PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana). Under this National Digital Literacy Mission people are given computer education so that they can be computer savvy. To make a person IT literate, so that they can easily access most of the digital devices, such as cell phones, tablets, etc., send and receive emails and surfing or can obtain any information from the net easily. Around 8 lakh of beneficiaries will be eligible for training fee support from the government. The rest 100,000 beneficiaries will be trained by the industry and civil society partners. Apart from this NDLM project we have got the opportunity work with one of the effective program of government known as Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana abbreviated as PMKVY. The allocated budget of this program is 13,000 crore. Under PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) Scheme a good amount of Indian youth given the golden opportunity to attend this industry-relevant skill training which will help them in securing a better livelihood. After the successfully completion of the training their skills will be accessed and then certified under RPL i.e Recognition of Prior Learning. The PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) scheme helps the youth to get skillfully qualified and get an advantage in querying good jobs or start up with their own work. For more details: About Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY Franchise) (prime minister skill development programme)
About HINDFS  
PMKVY Franchise affliate with HINDFS
HINDFS, the No.1 training partner in India, could be a learning organization created to enhance the standard of education in India. It focuses on high-quality, low-cost, and explicable interventions to handle gaps within the education system. The main aim of the HINDFS is to unfold smile on all faces. True it’s name, it’s the primary major organization to attain lasting, wide-scale success in India’s academic, health and plenty of other field. This has been created potential attributable to varied policies and techniques adopted by the organization and also the diligence and dedication of the whole team. HINDFS has worked on totally different social projects for education, children, women employment, special needs, health care, elderly care, environment and skill development. HINDFS is not only for senior citizen, for children, for women, for youth, but it’s for all. NGO who strongly believes in spreading HINDFS on everyone’s face by helping all. It’s a multi facilitated group registered by government, engaged in providing training/education in the field of Banking, Marketing, Finance, IT, Animation ,Multimedia, Management, Retail, Apparel, Electronic Installation, Beauty Wellness, Agriculture etc.

HINDFS’s vast & hardcore experience of 15 years in conducting Govt. recognized and conducting Govt. sponsored and free courses in various fields is an ever-beaten record and fact of its exemplary milestones achieved. Our mission is to generate competent Human Resources in the different field by imparting quality education.

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना बेरोजगारी भत्ता राजस्थान

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना  बेरोजगारी भत्ता राजस्थान

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना  बेरोजगारी भत्ता राजस्थान 2019-20 के नियम क्या हैं [अमाउंटऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म

राजस्थान की नई सरकार ने अपने मेनिफेस्टो के हिसाब से योजनाओ को लागू करना शुरू केआर दिया हैं । हाल ही में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री युवा संबल योजना का ऐलान किया हैं यह एक बेरोजगारी भत्ता योजना हैं जिसमें युवाओं को प्रति माह भत्ते के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी । सीएम युवा संबल योजना में कैसे आवेदन करे और कौन इस योजना का लाभ ले सकता हैं ऐसे सवालों के जवाब के लिए इस योजना को ध्यान से पढ़े।
योजनामुख्यमंत्री युवा संबल योजना
पुराना नामअक्षत योजना
लांच तारीख1 जुलाई 2012
योजना शुरू करने की तिथिफरवरी 2019
लागु की गईरोजगार विभाग राजस्थान
बेरोजगारी भत्ता3000 – 3500 Rs
लाभार्थीबेरोजगार युवा वर्ग
कांटेक्ट नंबर (Helpline number)0141-2373675,2368850
ऑफिसियल पोर्टल वेबसाइटemployment.livelihoods.rajasthan.gov.in
मुख्यमंत्री युवा संबल योजना बेरोजगारी भत्ता राजस्थान के लाभ एवं नियम
  • उद्देश्य मुख्यमंत्री युवा संबल योजना का मुख्य उद्देश्य बेरोजगारों को उनका हक़ देते हुए, आर्थिक सहायता करना है.  आज के समय में शिक्षा को बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है, देश की अधिकतर जनता अब शिक्षा के प्रति जगरूप हो गई है. नौजवान पैसे कमाने और बड़ा आदमी बनने के लिए कड़ी मेहनत करते है. अच्छी नौकरी सभी का सपना होता है, लेकिन नौकरी न लगने की वजह से वे हताश हो जाते है. कई नौजवान इससे परेशान होकर डिप्रेशन में आ जाते है. युवा वर्ग देश का भविष्य है, जिसके भविष्य को सवारने के लिए सरकार उनकी आर्थिक सहायता कर रही है.
  • बेरोजगारी भत्ता राशि   राजस्थान बेरोजगारी भत्ता में सरकार महिलाओं को 3500 रुपये एवं पुरुषों को 3000 रुपये दो वर्षो की अवधि तक देगी । इस तरह बेरोजगारों को इन दो वर्षों में अच्छा रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से काम करने का सही समय मिलेगा । पहले यह भत्ता 650 से 750 था जिसे 2019-20 के वित्तीय वर्ष में बढ़ा दिया गया हैं ।
पुरुष वर्ग3000 हर महीने
महिला वर्ग 3500 हर महीने
  • अवधि (Duration) – राजस्थान सरकार इस बेरोजगारी भत्ते को अधिकतम 2 सालों तक देगी। इस बीच में अगर किसी की नौकरी लग जाती है, या कोई अपना काम शुरू कर लेता है तो उसी समय भत्ता मिलना बंद हो जायेगा। (धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करके अगर कोई आवेदन करता है और विभाग को गुमराह करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।)
  • अक्षत बेरोजगारी भत्ता योजना का पंजीयन कार्य फरवरी 2019 से शुरू कर दिया जायेगा, फरवरी 2019 से ही भत्ते की राशि उम्मीद्वार को खाते में भेजी जायेगी । 
मुख्यमंत्री युवा संबल योजना बेरोजगारी भत्ता के लिये पात्रता नियम (Eligibility Criteria and Documents) –
  • राजस्थान मूल निवासी  लाभार्थी को योजना के अंतर्गत राशि तभी मिलेगी, जब वो राजस्थान प्रदेश का रहने वाला होगा। इसके लिए लाभार्थी को अपना मूल निवासी पत्र दस्तावेज के रूप में रखना होगा।
  • आयु सीमा  योजना के लिए एक आयु सीमा तय की गई है. इस उम्र के बीच के लोग ही इस योजना के योग्य है. 21 से 30 वर्ष के पुरुष, व  21 से 35 वर्ष की महिला, विकलांग (दिव्यांग), एसटी, एससी इस योजना के पात्र है. लाभार्थी को अपनी आयु का प्रमाण देने के लिए 10 वीं की मार्कशीट फॉर्म के साथ जमा करनी होगी।
  • शिक्षा – कम से कम स्नातक पास लाभार्थी ही इस योजना के लिए योग्य है. मास्टर डिग्री वाले भी इसके लिए आवेदन कर सकते है. लाभार्थी को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब उसने कक्षा 12वीं एवं कॉलेज की पढाई प्रदेश के अंदर आने वाले कॉलेज स्कूल से की होगी। फॉर्म के साथ उसे 12वीं की मार्कशीट एवं स्नातक की डिग्री जमा करनी होगी।
  • आय सीमा – लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय (माता-पिता या पति-पत्नी) 3 लाख या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक को आय प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है.
  • लाभार्थी किसी भी तरह की छोटी बड़ी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में कार्यरत न हो. वो किसी भी तरह के बिजनेस से भी न जुड़ा हो.
  • कोई भी लाभार्थी को अपने जिले के रोजगार विभाग में कम से कम एक साल तक पंजीकरण करना होगा। इस एक साल में अगर नौकरी नहीं मिलती है तो लाभार्थी को बेरोजगारी भत्ता मिलना शुरू हो जायेगा। भत्ता मिलने की स्थिति में भी लाभार्थी को अपना पंजीकरण रोजगार विभाग में करते रहना होगा।
  • परिवार में 2 से अधिक लोगों को इस योजना के अंतर्गत लाभ नहीं मिलेगा। एक ही परिवार के 2 लोग ही इसके लिए अप्लाई कर सकते है
  • राजस्थान सरकार ने 2009 में युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने के लिए अक्षत कौशल योजना लांच की थी. कोई भी लाभार्थी अक्षत कौशल योजना या बेरोजगारी भत्ता योजना (2012 वाली) में से किसी एक में ही आवेदन कर सकता है.
  • अगर कोई लाभार्थी किसी भी राजकीय या केंद्रीय योजना के तहत छात्रवृत्ति या भत्ता प्राप्त कर रहा है तो वो इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जायेगा।
  • जो लाभार्थी इस योजना के लिए अप्लाई करे उसका कोई भी पुलिस केस न चल रहा हो.
अन्य जरुरी दस्तावेज (Required Documents List) –
आवेदक को अपना आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड की फोटोकॉपी जमा करनी होगी। इसके अलावा सभी मार्कशीट भी आवेदक को  जमा करनी होगी। निःशक्त या दिव्यांग को इससे जुड़ा प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है. भामाशाह कार्ड राजस्थान में किसी भी योजना के लिए अनिवार्य होता है. सरकार ने भामाशाह से जुड़ी बहुत सी योजनाएं लागु की है. 
राजस्थान बेरोजगारी भत्ता योजना चयन प्रक्रिया (How to Select) –
  • हर साल 1 जुलाई को विभाग सिलेक्शन की प्रक्रिया करेगा। राजस्थान सरकार ने बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत नियम बनाया है कि हर साल अधिकतम 1 लाख लोगों को ही यह राशि दी जाएगी।
  • अगर 1 लाख से ज्यादा लोग योजना के पात्र होते है तो रोजगार विभाग ज्यादा उम्र वालों को पहले प्राथमिकता देगा।
  • अगर एक लाख से कम आवेदक सेलेक्ट होते है तो सभों को भत्ता मिलेगा, एवं 6 महीने बाद मतलब 1 जनवरी को फिर से चयन की प्रक्रिया की जाएगी।
  • 1 साल हो जाने के बाद आवेदक को 1 जुलाई के पहले अपना आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके बाद आवेदन मान्य नहीं होगा।
मुख्यमंत्री युवा संबल योजना राजस्थान ऑनलाइन फॉर्म आवेदन प्रक्रिया(Application form and Process)
  • आवेदन के लिए सबसे पहले राजस्थान की ऑफिसियल साइट पर जाएँhttp://employment.livelihoods.rajasthan.gov.in , वहां “अनएम्प्लॉयमेंट अलाउंस” पर क्लिक करें। इसके बाद अप्लाई पर क्लिक करें।
  • यहाँ एक नया नई पेज खुलेगा, पहली बार आवेदन करने के लिए साइट पर रजिस्टर करते हुए एसएसओ आईडी (SSO) बनायें।
  • अब फिर रजिस्ट्रेशन के लिए एक नया पेज खुलेगा, जहाँ अपनी सारी पर्सनल डिटेल्स डालनी होगी। ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर बहुत जरुरी होता है.
  • रजिस्ट्रेशन के बाद आपको लॉगिन आईडी और पासवर्ड, आपकी ईमेल आईडी या मोबाइल पर मैसेज के द्वारा आ जायेगा।
  • अब आवेदक को इस लॉगिन आईडी पासवर्ड के द्वारा ऑफिसियल साइटhttps://sso.rajasthan.gov.in/signin में लॉगिन करना होगा, फिर इस योजना के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरें और सारी डिटेल्स अच्छे से देख लेने के बाद उसे सबमिट कर दें. आप इस फॉर्म का प्रिंट आउट भी निकाल लें.
राजस्थान बेरोजगारी भत्ता आवेदन का स्टेटस कैसे चेक करें (How to check status)
आवेदन करने के बाद लाभार्थी अपने फॉर्म का स्टेटस भी चेक कर सकता है. इस योजना के अंतर्गत अपने आवेदन को निम्न तरीके से चेक करें –
  • आवेदक इस लिंक पर क्लिक करें http://www.employment.livelihoods.rajasthan.gov.in/Reports/JS/js_Unemployment%20Allowance_Status.aspx
  • यहाँ अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर या जन्म तारीख डालें।
  • अंत में सर्च बटन पर क्लिक करें, इसके बाद नए पेज में आपके आवेदन का स्टेटस स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिससे आपको अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति मालूम हो जाएगी।
बेरोजगारी भत्ता योजना से बहुत से बेरोजगारों को फायदा होता है. उन्हें 2 साल का समय मिलता है, जब वो नौकरी की तलाश करते है. इन दो सालों में सरकार इनकी आर्थिक सहायता करती है. सभी युवा वर्ग जो बेरोजगार है उन्हें इस योजना का लाभ जरूर लेना चाहिए.


Thursday, June 13, 2019

अन्नपूर्णा रसोई योजना


योजना के बारे में

राजस्थान सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों, रिक्शावालों, ठेलेवालों, ऑटोवालों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं, बुजुर्गों एवं अन्य असहायों, जरूरतमंद व्यक्तियों को ध्यान में रखकर उनकी सेहत के लिए अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरूआत की है।
इस योजना का शुभारम्भ 15 दिसंबर 2016 को किया गया। इस योजना में अन्नपूर्णा रसोई वैन के माध्यम से मात्र रु 5 में नाश्ता तथा मात्र रु 8 में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
योजना के दूसरे चरण में 191 शहरों में 500 अन्नपूर्णा रसोई वैनों के माध्यम से नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

अन्नपूर्णा रसोई योजना की विशेषताएं

इस रसोई वैन में लाभार्थियों के लिए नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं रात्रि का भोजन उपलब्ध होगा। योजना में नाश्ता मात्र 5 रुपये में मिलेगा। नाश्ता के रूप में पोहा, सेवइयाँ, इडली साँभर, लापसी, ज्वार खिचड़ा, बाजरा खिचड़ा, गेहूं खिचड़ा आदि मिलेंगे।
इस योजना में भोजन की थाली मात्र 8 रुपये में उपलब्ध है, जिसमें प्रत्येक भोजन सामग्री की मात्रा 450 ग्राम है। भोजन के रूप में दोपहर में दाल-चावल, गेहूं का चूरमा, मक्का का नमकीन खीचड़ा, रोटी का उपमा, दाल- ढ़ोकली, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-ढ़ोकली, ज्वार का नमकीन खीचड़ा, गेहूं का मीठा खीचड़ा इत्यादि शामिल हैं।
योजना में रात्रि भोजन में भी प्रति थाली मात्र 8 रुपये में उपलब्ध है, जिसमें सामग्री की मात्रा 450 ग्राम है। यह सामग्री इस प्रकार है: दाल-ढ़ोकली, बिरयानी, ज्वार की मीठी खिचड़ी, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-चावल, मक्के का नमकीन खीचड़ा, बेसन गट्टा पुलाव, बाजरे का मीठा खीचड़ा, दाल-चावल, गेहूं का चूरमा इत्यादि।

अन्नपूर्णा भंडारों


योजना के बारे में

राजस्थान सरकार ने गांव-गांव तक लोगों को ब्रांडेड उत्पाद उपलब्ध करवाने के लिए 31, अक्टूबर 2015 को जयपुर ज़िले में भम्भौरी गांव से अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरूआत की। योजना में उचित मूल्य की दुकानों को अन्नपूर्णा भंडार के रूप में विकसित किया गया है।

गावों में अब उपलब्ध हैं ब्रांडेड उत्पाद

शहरों में मिलने वाले ब्रांडेड उत्पाद अन्नपूर्णा भंडार के माध्यम से अब गावों में भी उपलब्ध हैं। 45 तरह के लगभग 350 से अधिक गुणवत्तायुक्त मल्टीब्रांड उत्पाद इन अन्नपूर्णा भंडारों पर उचित कीमत पर मिलते हैं।

रूरल मॉल का सपना हुआ साकार

गांवों में भी ब्रांडेड उत्पाद उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं को ज़रूरत का हर घरेलू सामान घर के नज़दीक ही उपलब्ध है। इन अन्नपूर्णा भंडारों से रूरल मॉल का सपना साकार हुआ है।

डीलर के लिए अतिरिक्त आय का जरिया

पहले राशन डीलर केवल चीनी, गेहूँ व कैरोसीन ही बेच रहे थे जिससे उनकी आय कम होती थी। इन्हें आजीविका के लिए अन्य स्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब डीलर ज़्यादा चीजें बेचते हैं, ज़्यादा दिन तक दुकान खोलते हैं। इससे उन्हें गांव में ही रोज़गार का साधन उपलब्ध हो गया, उनकी आय भी बढ़ गई और सामाजिक रुतबा भी बढ़ गया।

राशन वितरण योजना


योजना के बारे में

प्रदेश में हर परिवार को उसके हक़ का राशन मिले और पूरा मिले इसके लिए सरकार ने बायोमैट्रिक पहचान से राशन वितरण शुरू किया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पात्र व्यक्ति मशीन पर अंगूठा या अंगुली लगाकर राशन प्राप्त कर रहे हैं।

पात्र व्यक्ति को ही मिलता है राशन

सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पात्र व्यक्तियों की सूची तैयार की है। अपात्र व्यक्ति सूची से हट गये हैं। पात्र व्यक्तियों को बायोमैट्रिक पहचान के लिए अपना अंगूठा या अंगुली मशीन में लगाना होता है इसलिए एक व्यक्ति का राशन दूसरा नहीं ले सकता है।

पॉस मशीन से राशन लेने की प्रक्रिया

आप अपने हाथ का अंगूठा या कोई भी अंगुली पॉस मशीन पर लगा कर, अपनी पहचान दर्ज़ करके ले सकते हैं।
अंगूठा मशीन पर कुछ देर तक लगाए रखना होता है (जब तक मशीन में लाइट न जल उठे)
किसी कारण से अगर मशीन में किसी व्यक्ति की पहचान न हो सके तो परिवार का कोई और व्यक्ति (जिसका नाम भामाशाह में जुड़ा हो) भी अपनी पहचान दर्ज़ करवाकर परिवार का राशन ले सकता है।
अगर तीन बार में किसी व्यक्ति की पहचान दर्ज़ न हो तो भामाशाह में रजिस्टर्ड आपके मोबाइल पर मैसेज से अपने आप एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आ जाता है। इस ओटीपी को मशीन में दर्ज़ करके भी राशन लिया जा सकता है। अगर आपके परिवार का कोई मोबाइल भामाशाह में दर्ज़ नहीं है तो आप ई-मित्र केन्द्र पर जाकर इसे दर्ज़ करवा सकते हैं ताकि आपको यह सुविधा मिल सके।

मोबाइल पर मैसेज

इस व्यवस्था का फायदा यह भी है कि राशन की दुकान पर राशन आते ही मैसेज मिल जाता है कि आपका राशन आ गया है। इसके अलावा राशन लेने पर भी मैसेज मिल जाता है कि आपने इतना राशन ले लिया है और इतना राशन शेष है।

हिसाब की पूरी जानकारी

राशन लेने के बाद उपभोक्ता को हिसाब की पर्ची भी मिल जाती है जिससे लेन-देन व उपलब्ध शेष राशन की पूरी जानकारी उपभोक्ता को रहती है।

राजश्री योजना


योजना के बारे में

बेटियां घर की लक्ष्मी हैं लेकिन कई कारणों से बालिकाओं की जन्म दर कम रही है। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाने के लिए सरकार ने 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री राजश्री योजना राज्य में शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि बेटियों की जन्म दर बढ़े, बेटियों को अच्छी परवरिश मिले व बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ें।

विभिन्न चरणों में बालिका के अभिवावकों को आर्थिक सहायता

बालिका के जन्म से लेकर कक्षा 12वीं तक बेटी की पढ़ाई, स्वास्थ्य व देखभाल के लिए अभिभावक को 50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ये राशि निम्न चरणों में दी जाती है।
  • बेटी के जन्म के समय 2500 रुपये
  • एक वर्ष का टीकाकरण होने पर 2500 रुपये
  • पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर 4000 रुपये
  • कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये
  • कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर 11000 रुपये
  • कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर 25000 रुपये

योजना के लाभ की पात्रता

राजश्री योजना की पहली दो किश्त उन सभी बालिकाओं को मिलेगी जिनका जन्म किसी सरकारी अस्पताल एवं जननी सुरक्षा योजना (जे.एस.वाई.) से रजिस्टर्ड निजी चिकित्सा संस्थानों में हुआ हो। ये दोनों किश्त उनके अभिभावकों को तब भी मिलेगी जिनके तीसरी संतान बालिका हो, किंतु योजना में आगे की किश्तों का लाभ उन्हें नहीं मिल पायेगा।
अब राजश्री योजना का लाभ लाभार्थी को सीधा अपने बैंक खाते में मिले, इसके लिए भामाशाह कार्ड से योजना को जोड़ा गया है।
अब राजश्री योजना का लाभ सुविधापूर्वक अपने खाते में प्राप्त करने के लिए भामाशाह कार्ड ज़रूर बनवायें। योजना के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए अपने ज़िले में कार्यक्रम अधिकारी, महिला अधिकारिता या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से सम्पर्क करें।

भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता

  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का भामाशाह कार्ड अनिवार्य है।
  • 15 मई, 2017 के बाद लाभार्थी का भामाशाह कार्ड होने पर भुगतान सीधे उसके बैंक खाते किया जायेगा।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच/एएनसी जांच के दौरान भामाशाह कार्ड एवं भामाशाह कार्ड से जुड़ा हुआ बैंक खाते का विवरण निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पर ए.एन.एम./आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध करवायें।
  • जिन लाभार्थी महिलाओं का भामाशाह नामांकन नहीं हुआ है, ऐसी महिलाएं अपने निकटतम ई-मित्र केन्द्र से भामाशाह कार्ड बनवाकर निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में विवरण उपलब्ध करवाये।

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना

योजना के बारे में

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का आरम्भ 13 दिसंबर 2015 से किया गया। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ चुनिंदा निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में भी ये सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। राज्य के लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को कम करना इस योजना का उद्देश्य है।

योजना के लिए पात्रता

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल परिवार इस योजना में पात्र हैं।

योजना का फायदा

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष सामान्य बीमारियों के लिए 30 हज़ार तथा गम्भीर बीमारियों के लिए 3 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध करवाया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती के दौरान हुए खर्च के अलावा भर्ती से 7 दिन पहले से 15 दिन बाद तक का खर्च शामिल किया जाता है।
इस योजना में 1401 बीमारियों को शामिल किया गया है। इनके अतिरिक्त नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी तथा साइकियाट्री सहित 300 से अधिक स्पेशियलिटी उपचार के नए पैकेज भी जोड़े जाएंगे।
इससे पहले चल रही योजनाओं में केवल दवाइयां और जांच ही कैशलेस मिलती थीं, लेकिन अब भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में जांच, इलाज, डॉक्टर की फीस, ऑपरेशन आदि सब शामिल किये गए हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा ओ.पी.डी. व कैशलेस दवाओं के वितरण की व्यवस्था भी पहले से ज़्यादा बड़े स्तर पर की गई है।
राजस्थान की यह स्वास्थ्य बीमा योजना देश के अन्य राज्यों की इस तरह की योजनाओं से कहीं बेहतर है। इसमें बीमारियों और जांचों की संख्या भी और राज्यों से ज़्यादा है और निश्चित राशि भी। आज यह योजना पूरे प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए जीवनदायी साबित हो रही है।

योजना का लाभ लेना है आसान

अस्पताल में भर्ती के समय वहां उपस्थित ‘स्वास्थ्य मार्गदर्शक’ मरीज़ और परिजनों की मदद करते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को अपना भामाशाह कार्ड अस्पताल प्रशासन को देना होता है। उसके बाद की सारी प्रक्रिया की जि़म्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है।

योजना का क्रियान्वयन

योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल ऐप द्वारा मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। न्यू इंडिया इन्शोरेंस कम्पनी से इसका अनुबन्ध किया गया है।